

कारण ना जाने कोई
दिल रोया आँख ना रोई
कारण ना जाने कोई
तूफ़ा डुबोता तो शिकवा ना होता
खिवैया ने नैया डुबोई
कारण ना जाने कोई
दिल रोया आँख ना रोई
कारण ना जाने कोई
अपना कहा ना मुझको किसी ने
क्या मैं इतना पराया हूँ?
चलते हैं सब मुझसे बचके
क्या मैं गुनाहो का साया हूँ?
फिर ना जगी किस्मत ऐसी
मौत की निंदिया सोई
कारण ना जाने कोई
दिल रोया आँख ना रोई
कारण ना जाने कोई
पत्थर को भी चोट लगे तो
आग उगलने लगता है
जग को जलाकर दम लेता है
जब दिल जलने लगता है
फूल बना है बहार का दुश्मन
बाग बचेगा ना कोई
कारण ना जाने कोई
दिल रोया आँख ना रोई
कारण ना जाने कोई
प्यार जिन्हें मिलता है किसी का
वो संसार सजाते हैं
ठुकराए जाते हैं जो
दुनियाँ में तबाही लाते हैं
सूरज ने भी अंधेरों में पलकर
रोशनी कैसे खोई
कारण ना जाने कोई
दिल रोया आँख ना रोई
कारण ना जाने कोई
पेड़ बिना फल, फूल बिना
फुलवारी अधूरी होती है
जगती है जब ममता मन में
नारी पूरी होती है
मोम के जैसा पत्थर पिघला
दिल रोया आँख भी रोई
कारण ना जाने कोई
दिल रोया आँख भी रोई
कारण ना जाने कोई
कारण ना जाने कोई
Quelle: LRCLIB
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