

शाम-ए-गम की कसम, आज ग़मगीं है हम
आ भी जा, आ भी जा, आज मेरे सनम
शाम-ए-गम ��ी कसम
दिल परेशान है, रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा है हम
शाम-ए-गम की कसम
चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले ना दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसी है तो क्या, चांदनी है तो क्या
चांदनी जुल्म है, और जुदाई सितम
शाम-ए-गम की कसम, आज ग़मगीं है हम
आ भी जा, आ भी जा, आज मेरे सनम
शाम-ए-गम की कसम
अब तो आजा के अब रात भी सो गयी
जिन्दगी ग़म के सेहराओ में खो गयी
अब तो आजा के अब रात भी सो गयी
जिन्दगी ग़म के सेहराओ में खो गयी
ढूँढती है नजर, तू कहा है मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म
शाम-ए-गम की कसम, आज ग़मगीं है हम
आ भी जा, आ भी जा, आज मेरे सनम
शाम-ए-गम की कसम
Quelle: LRCLIB
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