

(ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला)
(चलते रहने दे)
(ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला)
(चलते रहने दे)
तेरा-मेरा मिलना ऐसे
इत्तिफ़ाक़न तो ना हुआ
कुछ तो होगा इश्क़ में तेरे
मैं यूँ पागल तो ना हुआ
कोई वजह होगी कि तू
हो रूबरू तो चैन है
कि मेरी हर सुबह में तू
शामें मेरी ढलते रहने दे
ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला
चलते रहने दे
ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला
चलते रहने दे
ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला
चलते रहने दे
ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला
चलते रहने दे
उजरी-गुजरी, तेरी घूँघट में चमके बिजरी
कुछ गाज नहीं, कुछ घोर नहीं
तेरी नैना में चमके बिजरी
Mmm, एक उम्र ये बीत गई
दस्तक हुए दरवाज़े पर
यूँ आया तू वरना कि हम
सोए थे अपने जनाज़े पर
तुमसे मिले फिर इक दफ़ा
जीने की ख़्वाहिश-सी हुई
कि तू मेरे सीने में ये
साँसें मेरी चलते रहने दे
ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला
चलते रहने दे
ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला
चलते रहने दे
नि-सा, नि-सा, नि-सा, नि-सा, नि-सा
नि-रे, नि-रे, नि-रे, नि-रे, नि-रे
सा-गा, सा-गा, सा-गा, सा-गा, सा-गा
पा-मा-गा, पा-मा-गा, पा-मा-गा, पा-मा-गा, रे-रे-सा
नि-सा, नि-सा, नि-सा, नि-सा, नि-सा
नि-रे, नि-रे, नि-रे, नि-रे, नि-रे
सा-गा, सा-गा, सा-गा, सा-गा
(ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला)
(चलते रहने दे)
(ऐ अजनबी, दिल की लगी का सिलसिला)
(चलते रहने दे)
कोरी-कोरी साँस ये म्हारी
ये नाम जपे से थारो, गोरी
गीत बिरह का कान सुनावै
राग भी तू ही, तू बारहखड़ी
राग भी तू ही, तू बारहखड़ी
पीड़-बाण, जलती जान
रंग लाग्यो, छूटे प्राण
कोई ना पढ़े हाल सही
आख्याँ सू खारी धार बही
आख्याँ सू खारी धार बही
आख्याँ सू खारी धार बही
Bron: LRCLIB
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