

Mustafa ZahidYouTube
एक खोया-खोया चाँद था, जो था ख़फ़ा-ख़फ़ा
एक टूटा-टूटा ख़्वाब था, जो तुझ से था जुड़ा
एक आधी-आधी आ�� थी, जो पूरी हो गई
तुम मिल गए तो जाने क्यूँ ये दूरी हो गई
पिया, लागे ना, जिया लागे ना
तेरे बिना, तेरे बिना, तेरे बिना, तेरे बिना
हो, आधी-अधूरी इस दास्ताँ में
कैसे कोई रंग लाए? कैसे कोई मुस्कुराए?
इतने ग़मों में दो पल खुशी के
कैसे भला याद आएँ? तुम को भुला ना पाएँ
एक प्यासी-प्यासी बूँद में जो मन मेरा जला
हर लमहा-लमहा तेरी ही यादों से था ये भरा
एक आधी-आधी आस थी, जो पूरी हो गई
तुम मिल गए तो जाने क्यूँ ये दूरी हो गई
पिया, लागे ना, जिया लागे ना
तेरे बिना, तेरे बिना, तेरे बिना, तेरे बिन��
तेरे बिना, तेरे बिना
तेरे बिना, तेरे बिना
Bron: LRCLIB
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