

कायर जो थे, वो शायर बने
अब क्या-क्या करें ये इश्क़ में
ना कहते थे कुछ जो, लगे खोज में
क्या लफ़्ज़ चुने नए आशिक़ ये
इश्क़ में तेरे हैं Faiz बने
अर्ज़ किया है
हमने भी लिखा कुछ तेरे बारे में है
ऐसे तू लगे कि गुलाब है
और ऐसे तू लगे कि गुलाब है
बाग़ों में दिल के खिल के
इन फ़िज़ाओं में छाए हो, हाय
और वैसे हम तो तेरे ही ग़ुलाम हैं
और वैसे हम तो तेरे ही ग़ुलाम हैं
बादशाह दिल के
तेरी बाज़ी में जो तू चाहे तो
डूबे दिलों की क्या नाव बनूँ?
मैं ख़ुद तैर पाऊँ ना आँखों में
शायर की फ़ितरत में ही डूबना
मैं क्या ही लड़ूँ तूफ़ानों से
इश्क़ में तेरे हैं Faiz बने
अर्ज़ किया है
हमने भी लिखा कुछ तेरे बारे में है
हाथों को सँभालें मेरे हाथों में
कैसे हाथों को सँभालें मेरे हाथों में
जब तक नींद ना आए
इन लकीरों में बातें हों, हाय
सा-रे-प-ग-रे-सा, रे-ग-प-ग, प-नि, प-नि
सा-रे-प-नि, प-ग, प-म, ग-म, ग-रे, ग-रे, सा-नि-सा
सा-रे-सा-नि-प-नि, स-ग-रे, रे-ग-प-नि-सा-ग
ग-रे-सा-रे-सा-नी, म-ध-प
प-नि-स-नि-प-नि, प-ग-प-रे-रे-सा
रे-ग, रे-ग, म-ध, प-नि, प-नि, सा-नि-धा
सा-नि, सा-नि, प-ध, प-म, ग-म-ग
हाँ, हाँ, mmm
हाँ, सब ने तो सब कह दिया है
क्या ही कहूँ, जो अभी भी अनकहा है
मैं, हाय, ना Mirza, ना Mir
ना Mahir, ना Zahir
करूँ कुछ नया मैं
हाय, पर जो भी लिखा है, जिया है
हाँ, जिया है
ऐसे, ऐसे, ऐसे, कैसे, वैसे, जैसे
जैसे मैं पढ़ूँ मेरे दिल में जो
मेरी आँखें भी पढ़ें तेरी आँखों को
क्या यह महफ़िल में बैठें
या उठें दौड़ जाने को? हाय
तेरी आँखों में तारीफ़ों की तलाश है
मेरी महफ़िल तेरे जाने से वीरान है
मैं बस शायर बना हूँ
सिर्फ़ तू सुनने आए तो
शायद शायर बना हूँ
सिर्फ़ तू सुनने आए तो
Bron: LRCLIB
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