

Mustafa ZahidYouTube
ये मेरे दिल का, जानाँ, एक आख़िरी फ़ैसला है
अब साथ होगा ना तेरा, ये दर्द की इंतिहा है
था प्यार तेरा तो झूठा, सच्चा मगर ये ख़ुदा है
तन्हाइयों में हूँ रोया तब जा के मुझको मिला है
दुनिया के रिश्तों में तो ये होता ही रहा है
लैला और मजनूँ भी तो एक-दूसरे से जुदा हैं
तन्हाई का अश्क मिटाए यहाँ
बर्बादियाँ भी सबको जाने मिली हैं कहाँ
तेरे बिना हम जी लेंगे, फिर क्यूँ रहें कोई गिले?
तेरे बिना हम सह लेंगे वो ज़ख़्म जो तुझसे मिले
है रुत नई, मौसम नया, इस दौर में कैसी वफ़ा
भर जाएगी तेरी कमी, मिल जाएगा अब कुछ नया
हाँ, ख़ुश हैं अब हम तो, तुझसे कहाँ हम ख़फ़ा हैं
तूने चुना है वो रस्ता, तेरे लिए जो बना है
एहसान तेरा मैं मानूँ, तन्हा मुझे जो किया है
जो प्यार तेरा है खोया, लगता है ख़ुद से मिला मैं
किस को मिला संग उम्र-भर का यहाँ?
वो ही रुलाए दिल चाहे जिसको सदा
तेरे बिना हम जी लेंगे, फिर क्यूँ रहें कोई गिले?
तेरे बिना हम सह लेंगे वो ज़ख़्म जो तुझसे मिले
तेरे बिना हम जी लेंगे, फिर क्यूँ रहें कोई गिले?
तेरे बिना हम सह लेंगे वो ज़ख़्म जो तुझसे मिले
तेरे बिना हम जी लेंगे (तेरे बिना हम सह लेंगे)
Источник: LRCLIB
Нет данных о слушателях
Нет данных о серверах
Нет последних воспроизведений