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मेरे महबूब, क़यामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरी नज़रें तो गिला करती है
तेरे दिल को भी, सनम, तुझ से शिकायत होगी
मेरे महबूब...
तेरी गली मैं आता, सनम
नग़्मा वफ़ा का गाता, सनम
तुझ से सुना ना जाता, सनम
फिर आज इधर आया हूँ
मगर ये कहने मैं दीवाना
ख़त्म बस आज ये वहशत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरे महबूब...
मेरी तरह तू आहें भरे
तू भी किसी से प्यार करे
और रहे वो तुझ से परे
तूने, ओ, सनम, ढाए हैं सितम
तो ये तू भूल ना जाना
कि ना तुझ पे भी इनायत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरे महबूब, क़यामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरी नज़रें तो गिला करती है
तेरे दिल को भी, सनम, तुझ से शिकायत होगी
मेरे महबूब...
Fuente: LRCLIB
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